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Yashu tso , exploring the unexplore

उच्च पर्वतीय झीलों का प्रदेश
*लद्दाख*

एक अनछुई झील की खोज यात्रा।

क्लाइम्बिंग का तीसरा दिन था, सभी 5000 के एल्टीट्यूड से 5600 पर आए थे,महान हिमालय  और देवी विंध्यवासिनी की पूजा,नारियल फोड़ने के बाद हमने गृह प्रवेश यानी बेस कैंप स्थापित किया,दुपहर के कहने में खिचड़ी और रोटी बनी थी निम्बू के अचार के साथ आह जबर स्वाद बढ़ गया था। सभी सदस्य खा के धूप में मैट बिछा के लेट गए।

मैंने आने के पहले बेसकैम्प के आसपास थोड़ी रिसर्च की थी जिसमे मुझे कई झीले दिखी जो   5300-5400  की ऊंचाई पर थी।जीपीएस चालू किया कुछ टेरेन का अनुमान लगाया फिर बाकी सदस्यो को बुलाया पर कोई भी चलने को तैयार न था सभी पोर्टर्स की हालत खराब थी तो मैंने किसी को फोर्स नही किया साथ चलने को।
बैग में कुछ जरूरी चीजें जैसे गैस कनस्तर और बर्नर ,वॉलिनी स्प्रे,वोवरान पेन किलर इन्जेक्शन, खाने में 2 मैगी,2 स्नेकर्स,हेडलैम्प लेके अकेले जाने का मुड़ बना लिया,कुक को बताया कि जा रहा हु अगर शाम 7 बजे न लौटू तो खोजने आ जाना उसने भी 😂 नीद में हा सर कह के करवट फेर ली। रास्ते में लगातार उतराई चढ़ाई थी पर एल्टीट्यूड गेन नही करना था ।
सुबह 6 बजे से ट्रेक कर के सबके साथ BC आया था शरीर चिल्ला के आराम करने को कह रहा था 😂 पर अंदर के कीड़े नही माने।

पहली झील 1 घंटे बाद बाये तरफ मिली जो कि बेहद साफ थी पर मुश्किल से 1 आध फिट पानी था।
यहाँ के मुर्मुट बेहद शर्मीले थे 100 200 मीटर दूर से ही वे दिखते वो भी अपने बिलो में छुपते हुए।
कई फाल्स रिज ने मेरी ट्रेकिंग को और कठिन बना दिया,अंततः मैं दिन के साढ़े 3 बजे वृहद याशु त्सो yashu tso के सामने था, शब्दो मे उस अहसास को बताना मुश्किल है,यह झील उन चुनिंदा जगहों में से एक है जिनकी एक भी तस्वीर इंटरनेट पर नही है,मेरी बनाई vdo को अब यूट्यूब गूगल सर्च में सजेस्ट करता है।

Yashu tso 2 km लंबी और 1 km चौड़ी  जमी हुई  झील है। जीपीएस में कुछ ही दूर बाई तरफ एक और झील दिख रही थी चूंकि छोटी थी तो पहले वही जाना ठीक समझा।
यह तीसरी अनाम झील थी यह भी आधी जमी हुई थी फोटो ली और याशु त्सो की तरफ बढ़ चला ।
इस धरती पर शायद ही कोई जगह हो जहाँ मानव के पग न पड़े हो , झील के किनारे बाकायदा गद्दी वालो ने पत्थर का घेरा बना रखा था ।
जीपीएस पर एक आखिरी झील जहाँ मैं उस दिन पैदल पहुच सकता था मुझ से एक घंटे दूर थी, वहाँ तक जाने का मतलब था कि याशु त्सो के बाएं किनारे से जाना और दाहिने किनारे से लौटने यानी झील की परिक्रमा हो जाती खैर जब ओखली में सर डाल ही दिया था तो क्या सोचना ।
मैं चौथी झील त्सो ओरदुंग और याशु के बीच एक धार से होता हुआ ऊपर पहुच गया जहाँ से दाहिनी तरफ याशु और बाये तरफ त्सो ओरदुंग दिख रही थी। बेहद भव्य नजारा था जो आंखों ने देखा उसका 10% भी कैमरे ने नही खिंचा ,त्सो ओरदुंग भी जमी हुई थी दूर कही जंगली याक चर रहे थे ।
लगभग 5 घंटो की लगातार ट्रैकिंग में मैंने कही पानी नही पिया था ,धार पर बर्फ थी पिघलाया और स्नीकर्स खाये। जगह तो मैंगी बना के तसल्ली से खाने के लायक थी पर समयाभाव था सूरज बेहद तेजी से पहाड़ो के पीछे डूब चुका था। मेरी घड़ी तापमान -1 बता रही थी।
धार से उतरते हुए इतनी भीषण तेज हवा मैने 5 वर्ष के घुमक्कड़ी के जीवन मे कभी नही झेली, 21,000 फिट ऊपर कई बार गया हूं  पर कभी नही।
मेरे कपड़ो में 1 लेयर बिड जी 100,क़ुचुया 500 वुलेन फिर इनके ऊपर विंड शीटर पर ठंड से अंदर तक हिल गया।
तेज हवा से सर्वाधिक चिंता जंगली जानवरों खास तौर पर स्नो लेपर्ड से थी हवा तेज थी तो कुछ भी सुनना समझना संभव नही था। लेपर्ड बहुत रेयरली किसी पर हमला करते है पर अकेला शिकार सब को पसंद होता है,मेरे पास अपने बचाव में आइस एक्स और पेपर स्प्रे थी पर इनका उपयोग मैं किसी बेजुबान पर नही करना चाहता था। सूरज की आखिरी किरणे लुंगसेर कांगड़ी पर ढल रही थी आसमान सुनहरे से नीला हो रहा था अंततः 8घंटे  और 16 km की ट्रेकिंग के बाद मैं अपने बेस कैंप सलामत पहुँच गया।
😂😂 मेरे कुक और पोर्टर्स जो साथ जाने को तैयार न थे वे तस्वीरे देख के अगले ही दिन सुबह नाश्ते के बाद निकल गए उन वृहद झीलों को देखने।

पोस्ट एक्सपीडिशन रिपोर्टिंग में मैं ADC लेह श्री Moses kunzang के सामने खड़ा था वे बेहद रुचि से मेरी तस्वीरों को देखने के बाद बोले मिटा दीजिये इन सभी तस्वीरों को,सोशल मीडिया पर डाल के आप एक अंधे दौड़ को ट्रिगर कर देंगे जिसमे हर कोई यही जाना चाहेगा। मेरे कानों के पास तो बम फट गया हो जैसे मैंने कहा सर
☺️💐 ये मेरी मेहनत का फल है और लद्दाख की खूबसूरती देखने दीजिये दुनिया को बाकी रही बात दौड़ की तो उस क्षेत्र में ट्रैकिंग की इजाजत नही है तो सामान्य लोग नही जा सकते सिर्फ पर्वतरोहन की इजाजत है तो क्या पता कोई टीम आये और उसमे भी कितनी संभावना है की उस टीम में से कोई उन झीलों की ओर जाए???? सर ADC लेह बेहद शालीन थे वे मेरी बातों का मतलब समझ चुके थे बोले आप नम्बर लिखवा दीजिये हम विचार कर के बताएंगे। मैंने भी वचन दिया की बिना एआपके परमिशन के तस्वीरे सोशल प्लेटफार्म पर नही डालूंगा।
एक जुलाई को फोन आया 😊 की आप शेयर कर सकते है बिना किसी दिक्कत के।

कृपया झील की लोकेशन न पूछे नही बता पाऊंगा 🙏 बाकी इंटरनेट गोल्ड माइन है आप अपने से खोज सकते है।

इस बेहद खूबसूरत झील की vdo यहाँ देख सकते है।

https://youtu.be/Aufn5zfvKYM

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