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Leh ladakh tour guide part-2

तो चलिए शुरू करते है लद्दाख यात्रा
(यह यात्रा वृतांत नही अपितु सूचना लेख है)

1990 में जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद चरम पर था कश्मीरी पंडित पलायन कर रहे थे,कश्मीर घाटी में पर्यटन शून्य हो गया और लोगो को आवश्यकता थी एक ऐसे स्थानापन्न की जहाँ कश्मीर जितनी खूबसूरती हो सुविधाएं हो,सड़क मार्ग  से पहुचना आसान हो और तब वह स्थानापन्न बना #मनाली।

महर्षि मनु के नाम पर मनुआलय का नाम कालांतर में बदलते बदलते मनाली हो गया।

मनाली भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार की स्वप्नस्थली सा है जहाँ बार से लेके पैराग्लाइडिंग तक की सुविधा उपलब्ध है।

दिल्ली लेह वाली बस सुबह सुबह मनाली पहुचती है ड्राइवर चेंज होता है पर कंडक्टर वही रहता है।
मनाली से लेह के लिए एक और बस चलती है जो की सुबह 4 बजे मनाली से निकलती है यह बस काफी सुविधाजनक पुश बैक सीट वाली होती है जिसमे आराम से बैठा जा सकता है। अगर मनाली शाम को पहुच कर पहले से ऑनलाइन बुकिंग हो तो इस बस को सुबह सुबह पकड़ा जा सकता है पर ये देर रात लेह पहुचाती है और किसी भी डेस्टिनेशन पर रात में पहुचना घुमक्कडी के नियमो के विपरीत है।

मनाली में बस स्टैंड के पास ही सुलभ शौचालय है जहाँ हल्का हुआ जा सकता है। बस स्टैंड के ठीक बगल में मनाली का मॉल रॉड है चुकी इतनी सुबह चहलपहल कम ही रहती है। चाय पीने के बाद बस केलांग के लिए निकलती है और पलचान गांव के ऊपर सुबह के  नाश्ते के लिए 20 मिनट रुकती है , यहाँ भी टॉयलेट सुविधा उपलब्ध है। आगे की सीट का फायदा यह है की बस रुकते ही आप तुरंत उतर जाते है और होटल पर भीड़ हो उससे पहले नाश्ते का ऑर्डर कर सकते है चुकी 20 मिनट काफी कम समय  होता है तो चालाकी ज्यादा मायने रखती है, नाश्ता हल्का ही बेहतर होता है क्यों की पहाड़ी रास्ते पर उल्टी की सामान्य शिकायत होती है मेरे केस में मैंने हमेशा नाश्ते में मैगी दुपहर में चावल राजमा और रात के खाने में बस 2 रोटी और सब्जी ली और औसतन 3 लीटर पानी पिया,इस डाइट से पेट भी हल्का रहा और लगातार बैठे रहने में भी कोई दिक्कत नही हुई । बस पलचान से रोहतांग तक लगातार चढ़ती है कई लोगो को यही उच्च पर्वतीय बीमारी का प्रथम आभास होता है। अगर आपका सर दुख रहा तो लगातार गहरी सांस लेते रहिये खिड़की से बाहर देखिए, कानो को न ढंके और कोई भी उछल कूद या शारीरिक हरकत बिल्कुल भी न करें।

रोहतांग यानी मृत्यु का दर्रा

रोहतांग का पुराना नाम भृगु तुंग  था पर अब यह पर्यटकों के मौज का प्रमुख केंद्र है।
पहले नेपाली मजदूर जल्दी काम पाने के उद्देश्य से मार्च में रोहतांग पार करते थे कभी कभी तो उनके पैरों में सिर्फ सामान्य चप्पल होती थी फिर जब मई में रोहतांग पास खुलता बर्फ पिघलती तो कई बदनसिबो के ठंडे बदन मिलते😢

रोहतांग से उतर कर बस कोकसर में लंच के लिए रुकती है। फिर चेनाब  पार के दाहिनी साइड हो जाती है यानी चेनाब और खुली घाटी एआपके बाए हाथ होते है तो फिर थोड़ी देर में रोहतांग सुरंग,सिस्सू झील,तांडी होते हुए बस केयलोंग पहुचती है लगभग शाम 4 बजे।

केयलोंग में उतरते ही सबसे पहले सामने कतार में होटल की तरफ जाए यंहा बेड 150 रुपये में और कमरे 6 से 800 रुपये में रनिंग हॉट वाटर के साथ उपलब्ध है यह आदर्श पैसे है यानी अगर 4 लोग एक 600 रुपये वाला कमरा शेयर करते है तो 150 रुपये प्रति व्यक्ति पड़ा। बस स्टैंड के पास ही हमेशा कमरा या बेड खोजे क्यों की अगले दिन बस सुबह 5 बजे निकलती है यानी 4 या सवा चार तक उठाना होता है और स्टैंड के पास कमरे का फायदा यह है की आप 2 मिनट में बस में होते है।

मेरे केस में मैंने जून में 700 रुपये का कमरा लिया था अकेले के लिए ठीक स्टैंड के सामने ही क्यों की मेरे साथ 2 बड़े कट्टे और 2  रकसैक 90 लीटर के भर के सामान था।
फिर जुलाई में 150 रुपये बेड के दिए और हाल में अपने झारखंडी भाइयो के साथ था फिर अगस्त में उसी होटल में बनारस मित्र के साथ रुका था 150 रुपये/बेड में ही।

केयलोंग में चाय पी के निकल पड़िए नीचे बाजार की तरफ फिर थोड़ा सा और नीचे सेब के बगीचों और गोभी के खेतो की तरफ , पहाड़ो में सूरज देर से डूबता है आराम से 7:30 तक खूब उजाला रहता है।
केलांग की देवी *लेडी ऑफ केलांग* हिमनद के भव्य दर्शन होते है💐।

केलांग बाजार एक सामान्य बाजार जैसा ही है 01 मोनेस्ट्री के अलावा कुछ दर्शनीय नही लगा।
केयलोंग से लेह के लिए बस सुबह 5 बजे निकलती है तो शाम को 8 बजे तक बिस्तर पकड़ना बेहतर होता है और अगर मेरी तरह आप भी आलसी है तो 10 20 अलार्म लगाना न भूले चुकी शरीर की सभी 208 हड्डियां दुख रही होती है तो नींद आने में कोई समस्या नही होती😊

इस वर्ष इस बस से मैने 6 बार दिल्ली लेह दिल्ली यात्रा की

मनाली में चाय 10
पलचान में मैगी फ्रूटी 30+12
कोकसर में राजमा चावल 80
केलांग में बेड 150
केलांग में चाय 20 खाना 80
सेब 1 किलो 30
आज का खर्च-392
अब तक कुल खर्च- 1938

केलांग से लेह शेष अगले भाग में

Leh ladakh budget trip part-1





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Suraj mishra

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