यार्सागुम्बा या कीड़ाजड़ी
देव हिमालय अपने श्वेत धवल उच्च शिखरों के अलावा औषधियों के लिए भी जाना जाता है।
हिमालय पर ऐसे भी फूल है जिन्होंने श्री रामचंद्र के अनुज श्री लक्ष्मण जी को जीवन दान दिया, ऐसे भी पौधे है जिनके छू लेने मात्र से आप मूर्छित हो सकते है। ऐसे भी पौधे है जो दवाइयों से बेहतर परिणाम देते है।
ट्री लाइन 3500 मीटर तक होती है उसके ऊपर पेड़ नही होते, बहुत छोटी झाड़ियां होती है, 5000 मीटर के ऊपर कवक/काई होते है।
यार्सागुम्बा 3500 मीटर के ऊपर हिमालयी घास के मैदानों में होता है,यह एक प्रकार का फंगस होता है, इसके वनस्पतिक गुण के बारे में ज्यादा नही पढ़ पाया।
चीन के खेल मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि खिलाड़ियों के स्टेमिना को बढ़ाने के लिए वे उन्हें यार्सागुम्बा खिलाते थे। यह किसी भी प्रकार के नशे या स्टेरॉयड में नही आता तो दिक्कत की कोई बात नही।
यार्सागुम्बा की अंतरराष्ट्रीय बाजार में डिमांड इसलिए भी ज्यादा है कि सभी शक्ति वर्धक दवाओं में इसका उपयोग किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 55 से 60 लाख रुपये प्रति kg है। यंहा धारचूला में 10 से 12 लाख रुपये kg है। अभी इसको खोजने का सीजन चल रहा तो यंहा के परतेक परिवार से लोग ऊपर पहाड़ो पर जा रखे।
देहरादून की फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कुछ साल पहले दावा किया था कि इसे प्रयोगशाला में बनाया जा चुका है। लोगो को बेहतर रोजगार मिले इसलिए वे अभी इसकी कृषि विधि पर रिसर्च कर रहे।
कीड़ाजड़ी की यह तस्वीर 2016 में एक ट्रेक पर ली थी।
नीले टेंट वाली तस्वीरे नेपाली हिमालया की है
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